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Hindi Hot Story - उषा की कहानी...

उषा अपने मा-बाप की एकलौती लड़की है और दिल्ली में रहती है। उषा के पिताजी मर चुके थे। जीवन शर्मा दिल्ली में ही एल आई सी में ऑफ़िसर थे और चार साल पहले स्वर्गवासी हो गये थे और उषा कि माता जी, श्रीमति रजनी एक हाऊस वाईफ़ है। उषा के और दो भाई भी है और उनकी शादी भी हो गई है। उषा ने पिछले साल ही ए में (इंगलिश) में पास किया है। उषा का रंग बहुत ही गोरा है और उसका फ़िगर 36-25-38 है। वो जब चलती है तो उसके कमार एक अजीब सी बल खाती है और चलते समय उसके चूतड़ बहुत हिलते है। उसके हिलते हुए चूतड़ को देख कर पड़ोस के कई नौजवान, और बूढे आदमियों का दिल मचल जाता है और उनके लण्ड खड़े हो जाते है। पड़ोस के कई लड़कों ने काफ़ी कोशिश की लेकिन उषा उनके हाथ नही आई। उषा अपनी पढाई और युनिवरसिटी के संगी साथी में ही व्यस्त रहती थी। थोड़े दिनो के बाद उषा कि शादी उसी शहर के रहने वाले एक पुलीस ऑफ़िसर से तय हो गई।

उस लड़के के नाम रमेश था और उसके पिताजी का नाम गोविन्द था और सब उनको गोविन्दजी कहकर बुलाते थे। गोविन्द जी अपनी जवानी के दिनो में और अपनी शादी के बाद भी हर औरत को अपनी नज़र से चोदते थे और जब कभी मौका मिलता था तो उनको अपनी लौड़े से भी चोदते थे। गोविन्द जी कि पत्नी का नाम स्नेहलता है और वो एक लेखिका है। अब तब गिरिजा जी ने करीब 8-10 किताबे लिख चुकी है। गोविन्द जी बहुत चोदू है और अब तक वो अपने घर में कई लड़कियों और औरतों को चोद चुके थे और अब जब कि उनकी काफ़ी उमार हो गई थी मौका पाते ही कोई ना कोई औरत को पटा कर अपना बिस्तर गरम कराते थे। गोविंदजी का लण्ड की लम्बाई करीब साढे आठ इन्च लम्बा और मोटाई करीब साढे तीन इन्च है और वो जब कोई औरत की चूत में अपना लण्ड डालते थे तो 25-30 मिनट के पहले वो झड़ते नही है। इसलिये जो औरत उनसे अपनी चूत चुदवा लेती है फिर दोबारा मौका पाते ही उनका लण्ड अपनी चूत में पिलवा लेती है।

आज उषा का सुहागरात है। परसों ही उसकी शादी रमेश के साथ हुई थी। उषा इस समय अपने कमरे में सज धज कर बैठी अपनी पति का इन्तज़ार कर रही है। उसकि पति कैसे उसके साथ पेश आयेगा, ये सोच सोच कर उषा का दिल जोर जोर से धड़क रहा है। सुहागरात में क्या क्या होता है, यह उसको उसकी भाभी और सहेलियों ने सब बाता दिया था। उषा को मालूम है कि आज रात को उसके पति कमरे में आ कर उसको चूमेगा, उसकि चूंचियों को दबायेगा, मसलेगा और फिर उसके कपड़ों को उतार कर उसको नंगी करेगा। फिर खुद अपने कपड़े उतर कर नंगा हो जायेगा। इसके बाद, उसका पति अपने खड़े लण्ड से उसकी चूत की चटनी बनते हुए उसको चोदेगा।

वैसे तो उषा को चुदवाने का तजुरबा शादी के पहले से ही है। उषा अपने कॉलेज के दिनो में अपने क्लासके कई लड़कों का लण्ड अपने चूत में उतरवा चुकी है। एक लड़के ने तो उषा को उसकी सहली के घर ले जा कर सहेली के सामने ही चोदा था और फिर सहेली कि गाण्ड भी मारी थी। एक बार तो उषा अपने एक सहेली के घर पर शादी में गई हुई थी। वहां उस सहली के भाई, सुरेश, ने उसको अकेले में छेड़ दिया था और उषा की चूंची दबा दिया। उषा ने तो सिर्फ़ मुसकुरा दिया था। फिर सहली के भाई ने आगे बढ कर उषा को पकड़ लिया और चूम लिया। तब उषा ने भी बढ कर सहेली के भाई को चूम लिया। तब सुरेश ने उषा के ब्लाऊज के अन्दर हाथ डाल उसकी चूंची मसलने लगा और उषा भी गरम हो कर अपनी चूंची मसलवाने लगी और एक हाथ से उसके पेण्ट के ऊपर से उसके लण्ड पर रख दिया। तब सुरेश ने उषा को पकड़ कर छत पर ले गया। छत पर कोई नही था, क्योंकि सारे घर के लोग नीचे शादी में व्यस्त थे। छत पर जा कर सुरेश ने उषा को छत कि दीवार के सहारे खड़े कर दिया और उषा से लिपट गया। सुरेश एक हाथ से उषा कि चूंची दबा रहा था और दूसरा हाथ साड़ी के अन्दर डाल कर उसकी बुर को सहला रहा था। थोड़ी देर में ही उषा गरमा गई और उसके मुंह से तरह तरह कि आवाज निकलने लगी। फिर जब सुरेश ने उषा कि साड़ी उतरना चाहा तो उषा ने मना कर दिया और बोली, “नही सुरेश हमको एकदम से नंगी मत करो। तुम मेरी साड़ी उठा कर, पीछे से अपना गधे जैसा लण्ड मेरी चूत में पेल कर मुझे चोद दो।” लेकिन सुरेश ना माना और उसने उषा को पूरी तरह नंगी करके उसको छत के मुंडेर से खड़े करके उसके पीछे जा कर अपना लण्ड उसकी चूत में पेल कर उसको खूब रगड़ रगड़ कर चोदा। चोदते समय सुरेश अपने हाथो से उषा कि चूंचियों को भी मसल रहा था। उषा अपनी चूत कि चुदाई का बहुत मजा ले रही थी और सुरेश के हर धक्के के साथ साथ अपनी कमार हिला हिला कर सुरेश का लण्ड अपनी चूत में खा रही थी। थोड़ी देर के बाद सुरेश उषा कि चूत चोदते चोदते झड़ गया। सुरेश के झड़ते ही उषा ने अपनी चूत से सुरेश का लण्ड निकल दिया और खुद सुरेश के सामने बैठ कर उसका लण्ड अपने मुंह में ले कर चाट चाट कर साफ़ कर दिया। थोड़ी देर के बाद उषा और सुरेश दोनो छत से नीचे आ गये।

आज उषा अपनी सुहागरात कि सेज पर अपनी कई बार की चुदी हुई चूत लेकर अपने पति के लिये बैठी थी। उसका दिल जोर जोर से धड़क रहा था क्योंकि उषा को डर था कि कहीं उसके पति को यह ना पता चल जाये कि उषा पहले ही चुदाई का आनन्द ले चुकी है। थोड़ी देर के बाद कमरे का दरवाजा खुला। उषा ने अपनी आंख तिरछी करके देखा कि उसके ससुरजी, गोविन्द जी, कमरे में आये हुए है। उषा का माथा ठनका, कि सुहागरात के दिन ससुरजी को क्या काम आ गया है।

खैर उषा चुपचप अपने आप को सिकोड़े हुये बैठी रही। थोड़ी देर के बाद गोविन्द जी सुहाग कि सेज के पास आये और उषा के तरफ़ देख कर बोला,”बेटी मैं जानता हूं कि तुम अपने पति के लिये इनतजार कर रही हो। आज के सब लड़के अपने पति का इनतजार कराती है। इस दिन के लिये सब लड़कियों का बहुत दिनो से इनतजार रहता है। लेकिन तुम्हारा पति, रमेश, आज तुमसे सुहागरात मनाने नही आ पायेगा। अभी अभी थाने से फोन आया था और वोह अपनी यूनिफ़ार्म पहन कर थाने चला गया। जाते जाते, रमेश यह कह गया कि शहर के कई भाग में डकैती पड़ी है और वोह उसकी छानबीन करने जा रहा है। लेकिन बेटी तू बिलकुल चिन्ता मत करना। मैं तेरी सुहागरात खाली नही जाने दूंगा।” उषा अपने ससुरजी की बात सुन तो लिया पर अपने ससुर कि बात उसके दिमाग में नही घुसी, और उषा अपना चेहरा उठा कर अपने ससुर को देखाने लगी। गोविन्द जी ने आगे बढ कर उषा को पलंग पर से उठा लिया और जमीन पर खड़े कर दिया। तब गोविन्द जी मुसकुरा कर उषा से बोले, “घबाराना नही, मैं तुम्हारा सुहागरात बेकार जाने नही दूंगा, कोई बात नही, रमेश नही तो क्या हुआ मैं तो हूं।” इतना कह कर गोविन्द जी आगे बढ कर उषा को अपने बाहों में भर कर उसकि होठों पर चूम्मा दे दिया।

जैसे ही गोविन्द जी ने उषा के होठों पर चूम्मा दिया, उषा चौंक गई और अपने ससुरजी से बोली, “यह आप क्या कर रहे है। मैं तो आपके बेटे कि पत्नी हूं और उस लिहाज से मैं आप कि बेटी लगती हूं और आप मुझको चूम रहे है?” गोविन्द जी ने तब उषा से कह, “पागल लड़की, अरे मैं तो तुम्हारी सुहागरात बेकार ना जाये इसालीये तुमको चूमा। अरे लड़कियां जब शादी के पहले जब शिव लिंग पर पानी चढाते है तब वो क्या मांगती है? वो मांगती है कि शादी के बाद उसका पति उसको सुहागरात में खूब रगड़े। समझी? उषा ने अपना चेहरा नीचे करके पूछा, “मैं तो सब समझ गई, लेकिन सुहागरात और रगड़ने वाली बात नही समझी।” गोविन्द जी मुसकुरा कर बोले, “अरे बेटी इसमे ना समझने कि क्या बात है? तू क्या नही जानती कि सुहागरात में पति और पत्नी क्या क्या करते है? क्या तुझे यह नही मालूम कि सुहागरात में पति अपने पत्नी को कैसे रगड़ता है?” उषा अपनी सिर को नीचे रखती हुइ बोली, “हां, मालूम तो है कि पहली रात को पति और पत्नी क्या क्या करते और करवाते हैं। लेकिन, आप ऐसा क्यों कह रहे है?” तब गोविन्द जी ने आगे बढ कर उषा को अपनी बांहो में भर लिया और उसके होठों को चूमते हुए बोले, “अरे बहू, तेरा सुहागरात खाली ना जाये, इसालीये मैं तेरे साथ वो सब काम करुंगा जो एक आदमी और औरत सुहागरात में कराते हैं।”

उषा अपनी ससुर के मुंह से उनकी बात सुन कर शर्मा गई और अपने हाथों से अपना चेहरा ढंक लिया और अपने ससुर से बोली, “ यह बात आप कह रहे है। मैं आपके बेटे कि पत्नी हूं और इस नाते से मैं अपकी बेटी समान हूं और मुझसे आप ये क्या कह रहे है?” तब गोविन्द जी अपने हाथो से उषा कि चूंचियों को पकड़ कर दबाते हुए बोले, “हां , मैं जानता हूं कि तू मेरी बेटी के समान है। लेकिन मैं तुझे अपने सुहागरात में तड़पते नही देख सकता और इसलिये मैं तेरे पास आया हूं।” तब उषा अपने चेहेरे से अपना हाथ हटा कर बोली, “ठीक है बाबूजी, आप मेरे से उमार में बड़े है। आप जो ही कह रहे है, ठीक ही कह रहे है। लेकिन घर में आप और मेरे सिवा और भी तो लोग है।” उषा का इशारा अपने सासू मां के लिये था। तब गोविन्द जी ने उषा कि चूंची को अपने हाथो से ब्लाऊज के उपर से मलते हुए कह, “उषा तुम चिंता मत करो। तुम्हारी सासू मां को सोने से पहले दूध पीने कि आदत है, और आज मैंने उनको दूध में दो नींद की गोली मिला कर उनको पिला दिया है। अब रात भर वो आरम से सोती रहेंगी।” तब उषा ने अपने हाथो से अपने ससुरजी की कमार पकड़ते हुए बोली, “अब आप जो भी करना है कीजिए, मैं मना नही करुंगी।”

तब गोविन्द जी उषा को अपने बाहों में भींच लिया और उसके मुंह को बेतहाशा चूमने लगे और अपने दोनो हाथों से उसकि चूंचियों को पकड़ कर दबाने लगे। उषा भी चुप नही थी। वो अपने हाथो से अपने ससुर का लण्ड उनके कपड़े के ऊपर से पकड़ कर मुठ मार रही थी। गोविन्द जी अब रुकने के मूड में नही थे। उन्होने उषा को अपने से अलग किया और उसकी साड़ी का पल्लू को कंधे से नीचे गिरा दिया। पल्लू को नीचे गिराते ही उषा की दो बड़ी बड़ी चूंची उसके ब्लाऊज के ऊपर से गोल गोल दिखाने लगी। उन चूंची को देखते ही गोविन्द जी उन पर टूट पड़े और अपना मुंह उस पर रगड़ने लगे। उषा कि मुंह से ओह! ओह! अह! क्या कर रहे हो की आवाजे आने लगी। थोड़ी देर के बाद गोविन्द जी ने उषा कि साड़ी उतार दिया और तब उषा अपने पेटीकोट पहने ही दौड़ कर कमरे का दरवजा बंद कर दिया। लेकिन जब उषा कमरे कि लाईट बुझाना चाहा तो गोविन्द जी ने मना कर दिया और बोले, “नही बात्ती मत बंद करो। पहले दिन रोशनी में तुम्हारी चूत चोदने में बहुत मज़ा आयेगा।” उषा शर्मा कर बोली, “ठीक है मैं बत्ती बंद नही करती, लेकिन आप भी मुझको बिलकुल नंगी मत कीजियेगा।”

“अरे जब थोड़ी देर के बाद तुम मेरा लण्ड अपनी चूत में पिलवाओगी तब नंगी होने में शरम कैसी। चलो इधर मेरे पास आओ, मैं अभी तुमको नंगी कर देता हूं।” उषा चुपचाप अपना सर नीचे किये अपने ससुर के पास चली आई।

जैसे ही उषा नज़दीक आई, गोविन्द जी ने उसको पकड़ लिया और उसके ब्लाऊज के बटन खोलने लगे। बटन खुलते ही उषा कि बड़ी बड़ी गोल गोल चूंचियां उसके ब्रा के उपर से दिखाने लगी। गोविन्द जी अब अपना हाथ उषा के पीछे ले जकर उषा कि ब्रा का हुक भी खोल दिया। हुक खुलते ही उषा कि चूंची बाहर गोविन्द जी के मुंह के सामने झूलने लगी। गोविन्द जी ने तुरंत उन चूंचियों को अपने मुंह में भर लिया और उनको चूसने लगे। उषा कि चूंचियों को चूसते चूसते वो उषा कि पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया और पेटीकोट उषा के नितम्बों से सरकते हुए उषा के पैर के पास जा गिरा। अब उषा अपने ससुर के समने सिर्फ़ अपने पेण्टी पहने खड़ी थी। गोविन्द जी ने झट से उषा कि पेण्टी भी उतर दी और उषा बिलकुल नंगी हो गई। नंगी होते ही उषा ने अपनी चूत अपने हाथो से छुपा लिया और शरमा कर अपने ससुर को कनखियों से देखाने लगी। गोविन्द जी नंगी उषा के सामने जमीन पर बैठ गये और उषा कि चूत पर अपना मुंह लगा दिया। पहले गोविन्द जी अपने बहू कि चूत को खूब सूंघा। उषा कि चूत से निकलती सौंधी सौंधी खुशबु गोविन्द जी के नाक में भर गई। वो बड़े चाव से उषा कि चूत को सूंघने लगे। थोड़ी देर के बाद उन्होने अपना जीव निकल कर उषा कि चूत को चाटना शुरु कर दिया। जैसे ही उनका जीव उषा कि चूत में घुसा, तो उषा जो कि पलंग के सहारे खड़ी थी, पलंग पर अपनी चूतड़ टिका दिया और अपने पैर फ़ैला कर अपनी चूत अपनी ससुर से चटवाने लगी। थोड़ी देर तक उषा कि चूत चाटने के बाद गोविन्द जी अपना जीव उषा कि चूत के अन्दर डाल दिया और अपनी जीव को घुमा घुमा कर चूत को चूसने लगे। अपनी चूत चाटने से उषा बहुत गरम हो गई और उसने अपने हाथो से अपनी ससुर का सिर पकड़ कर अपनी चूत में दबाने लगी और उसके मुंह से सी सी की आवाजे निकलने लगी।

अब गोविन्द जी उठ कर उषा को पलंग पर पीठ के बल लेटा दिया। जैसे ही उषा पलंग पर लेटी, गोविन्द जी झपट कर उषा पर चढ कर बैठ गये और अपने दोनो हाथो से उषा कि चूंचियों को पकड़ कर मसलने लगे। गोविन्द जी अपने हाथों से उषा कि चूंची को मसाल रहे थे और मुंह से बोल रहे थे, “मुझे मालूम था कि तेरी चूंची इतनी मस्त होगी। मैं जब पहली बार तुझको देखाने गया था तो मेरा नज़र तेरी चूंची पर ही थी और मैने उसी दिन सोच लिया था इन चूंचियों पर मैं एक ना एक दिन जरूर अपना हाथ रखूंगा और इनको रगड़ रगड़ कर दबाऊंगा। “हाय! अह! ओह! यह आप क्या कह रहे है? एक बाप होकर अपने लड़के के लिये लड़की देखते वक्त आप उसकी सिरफ़ चूंचियों को घूर रहे थे। छीः कितने गन्दे है आप” उषा मचलती हुई बोली। तब गोविन्द जी उषा को चूमते हुए बोले, “अरे मैं तो गन्दा हूं ही, लेकिन तू क्या कम गन्दी है? अपने ससुर के सामने बिलकुल नंगी पड़ी हुई है और अपनी चूंचियों को ससुर से मसलवा रही है? अब बाता कौन ज्यादा गन्दा है, मैं या तू?” फिर गोविन्द जी ने उषा से पूछा, “अच्छा यह बाता कि चूंची मसलने से तेरा क्या हाल हो रहा है?” उषा अपने ससुर से लिपट कर बोली, “"ऊऊह्हह्हह और जोर से हां, ससुरजी और जोर से दबाओ बड़ा मजा आ रहा है मुझे, अपका हाथ औरतों की चूंची से खेलने में बहुत ही माहीर है। आपको पता है कि औरतों की चूंची कैसे दबाया जाता है। और जोर से दबाईये, मुझे बहुत मज़ा आ रहा है। फिर उषा अपने ससुर को अपने हाथों से बांधते हुए बोली, “अब बहुत हो गया है चूंची से खेलना। आपको इसके आगे जो भी करने वाले हैन जल्दी कीजिये, कहीं रमेश ना आ जाये और मेरी भी चूत में खुजली हो रही है।” “अभी लो, मैं अभी तुझको अपने इस मोटे लण्ड से चोदता हूं। आज तुझको मैं ऐसा चोदुंगा कि तु जिंदगी भर याद रखेगी” इतना कह कर गोविन्द जी उठकर उषा के पैरों के बीच उकड़ू हो कर बैठ गये।

ससुर जी को अपने ऊपर से उठते ही उषा ने अपनी दोनो टांगों को फ़ैला कर ऊपर उठा लिया और उनको घुटने से मोड़ कर अपना घुटना अपने चूंचियों पर लगा लिया। इसासे उषा कि चूत पूरी तरह से खुल कर ऊपर आ गई और अपने ससुर के लण्ड अपनी चूत को खिलाने के लिये तैयार हो गई। गोविन्द जी भी उठ कर अपना धोiति उतार, चड्डी, कुरता और बनियान उतार कर नंगे हो गये और फिर से उषा के खुले हुए पैरो के बीच में आकर बैठ गये। तब उषा उठ कर अपने ससुर का तनतनाया हुअ लण्ड अपने नाज़ुक हाथों से पकड़ लिया और बोली, “ऊओह्हह्हह ससुरजी कितना मोटा और सख्त है अपका यह।” गोविन्द जी तब उषा के कान से अपना मुंह लगा कर बोले, “मेरा क्या? बोल ना उषा, बोल” गोविन्द जी अपने हाथों से उषा कि गदराई हुई चूंचियों को अपने दोनो हाथों से मसाल रहे थी और उषा अपने ससुर का लण्ड पकड़ कर मुट्ठी में बांधते हुए बोली, "आआअह्हह्ह ऊओफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़ ऊईईइम्मम्ममाआ ऊऊह्हह्ह ऊऊउह्हह्हह्हह्ह! आपका यह पेनिस स्सास्सह्हह्हह्हह्ह ऊऊम्मम्मम्ममाआह्हह्ह।" गोविन्द जी फिर से उषा के कान पर धीरे से बोले, "उषा हिन्दी में बोलो ना इसका नाम प्लीज"। उषा ससुर के लण्ड को अपने हाथों में भर कर अपनी नज़र नीची कर के अपने ससुर से बोली, “मैं नही जानती, आप ही बोलीए ना, हिन्दी में इसको क्या कहते हैं।” गोविन्द जी ने हंस कर उषा कि चूंची को चूसते हुए बोले, “अरे ससुर के सामने नंगी बैठी है और यह नही जानती कि अपने हाथ में क्या पकड़ रखी है? बोल बेटी बोल इसको हिन्दी में क्या कहते और इसासे अभी हम तेरे साथ क्या करेंगे।”

तब उषा ने शर्मा कर अपने ससुर के नगी छती में मुंह छुपाते हुए बोली, “ससुर जी मैं अपने हाथों से आपका खड़ा हुआ मोटा लण्ड पकड़ रखा है, और थोड़ी देर के बाद आप इस लण्ड को मेरी चूत के अन्दर डाल कर मेरी चुदाई करेंगे। बस अब तो खुश है न आप। अब मैं बिलकुल बेशरम होकर आपसे बात करुंगी।” इतना सुन कर गोविन्द जी ने तब उषा को फिर से पलंग पर पीठ के बल लेटा दिया और अपने बहू की टांगो को अपने हाथों से खोल कर खुद उन खुली टांगो के बीच बैठ गये। बैठने के बाद उन्होने झुक कर उषा कि चूत पर दो तीन चूम्मा दिया और फिर अपना लण्ड अपने हाथों से पकड़ कर अपनी बहू कि चूत के दरवाजे पर रख दिया। चूत पर लण्ड रखते ही उषा अपनी कमार उठा उठा कर अपनी ससुर के लण्ड को अपनी चूत में लेने की कोशिश करने लगी। उषा कि बेताबी देख कर गोविन्द जी अपने बहू से बोले, “रुक छिनाल रुक, चूत के सामने लण्ड आते ही अपनी कमार उचका रही है। मैं अभी तेरे चूत कि खुजली दूर करुता हूं।” उषा तब अपने ससुर के छाती पर हाथ रख कर उनकी निप्पले के अपने अंगुलियों से मसलते हुए बोली, “ऊऊह्हह ससुरजी बहुत हो गया है। अब बार्दाश्त नहीं हो रहा है आओ ना ऊऊओह्हह प्लीज ससुरजी, आओ ना, आओ और जल्दी से मुझको चोदो। अब देर मत करो अब मुझे चोदो ना और कितनी देर करेंगे ससुरजी। ससुर जी जल्दी से अपना यह मोटा लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ दीजिये। मैं अपनी चूत कि खुजली से पागल हुए जा रही हूं। जल्दी से मुझे अपने लण्ड से चोदिये। अह! ओह! क्या मस्त लण्ड है आपका।” गोविन्द जी अपना लण्ड अपने बहू कि चूत में ठेलते हुए बोले, “वाह रे मेरी छिनाल बहू, तू तो बड़ी चुद्दकड़ है। अपने मुंह से ही अपने ससुर के लण्ड की तारीफ़ कर रही है और अपनी चूत को मेरा लण्ड खिलाने के लिये अपनी कमार उचका रही है। देख मैं आज रात को तेरे चूत कि क्या हालत बनाता हूं। साली तुझको चोद चोद कर तेरी चूत को भोसड़ा बना दूंगा” और उन्होने एक ही झटके के साथ अपना लण्ड उषा कि चूत में डाल दिया।

चूत में अपने ससुर का लण्ड घुसते ही उषा कि मुंह से एक हलकी सी चीख निकल गई और उसने अपने हाथों से अपने ससुर को पकड़ उनका सर अपनी चूंचियों से लगा दिया और बोलने लगी, “वाह! वह ससुर जी क्या मस्त लण्ड है आपका। मेरी तो चूत पूरी तरह से भर गई। अब जोर जोर से धक्का मार कर मेरी चूत कि खुजली मिटा दो। चूत में बहुत खुजली हो रही है।” “अभी लो मेरे चिनल चुद्दकड़ बहू, अभी मैं तेरी चूत कि सारी कि सारी खुजली अपने लण्ड के धक्के के साथ मिटाता हूं” गोविन्द जी कमार हिला कर झटके के साथ धक्का मारते हुए बोले। उषा भी अपने ससुर के धक्के के साथ अपनी कमार उछाल उछाल कर अपनी चूत में अपने ससुर का लण्ड लेते बोली, “ओह! अह! अह! ससुरजी मज़ा आ गया। मुझे तो तारे नज़र आ रहे हैं। आपको वाकई में औरत कि चूत चोदने कि कला आती है। चोदिए चोदिए अपने बहू कि मस्त चूत में अपना लण्ड डाल कर खूब चोदिए। बहुत मज़ा मिल रहा है। अब मैं तो आपसे रोज़ अपनी चूत चुदवाऊंगी। बोलीये चोदेंगे ना मेरी चूत?” गोविन्द जी अपनी बहू की बात सुन कर मुसकुरा दिये और अपना लण्ड उसकी चूत के अन्दर बाहर करना जारी रखा। उषा अपनी ससुर के लण्ड से अपनी चूत चुदवा कर बेहाल हो रही थी और बड़बड़ा रही थी,

“आआह्हह्हह ससुरजीईए जोर्रर्रर सीई। हन्नन्न सासयरजीए जूर्रर्रर जूर्रर्र से धक्कक्काअ लगीईईई, और्रर्रर जूर्रर सीई चोदिईईए अपनी बहू की चूत्तत्त को। मुझीई बहुत्तत्त अस्सह्ह्हाअ लाअग्गग रह्हह्हाअ हैईइ, ऊऊओह्ह्ह और जोर से चोदो मुझे आआह्हह्ह सौऊउर्रर्रजीए और जोर से करो आआअहह्हह्हह्ह और अन्दर जोर से। ऊऊओह्हह्ह दीआर्रर ऊऊओह्हह्हह्ह ऊऊऊफ़्फ़फ़् आआह्हह्हह आआह्हह्हह्ह ऊउईईई आअह्हहह ऊऊम्मम्माआह्ह्हह्हह ऊऊऊह्हह्हह।"

थोड़ी देर तक जोर जोर के धक्को से अपने बहू की चूत चोदने के बाद गोविन्द जी ने अपना धक्को की रफ़्तार धीमी कर दिया और उषा की चूंचियों को फिर से अपने हाथों में पकड़ कर उषा से पूछा, “बहू कैसा लग रहा है अपने ससुर का लण्ड अपनी चूत में पिलवा कर?” तब उषा अपनी कमार उठा उठा कर चूत में लण्ड की चोट लेती हुइ बोली, “ससुरजी अपसे चूत चुदवा कर मैं और मेरी चूत दोनो का हाल ही बेहाल हो गया है। आप चूत चोद ने में बहुत एक्सपर्ट है बड़ा मजा आ रहा है मुझे ससुरजी, ऊओह्हह्हह ससुरजी आप बहुत अच्छा चोदते है आआह्हह्हह्ह ऊऊऊह्हह्हह्ह। ऊऊओफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़ ससुरजी आप बहुत ही एक्सपर्ट है और आपको औरतों कि चूत चोद कर औरतों को सुख देना बहुत अच्छी तरह से आता है। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है यूं ही हां, ससुर जी यूं ही चोदो मुझे आप बहुत अच्छे हो बस यू ही चुदाई करो मेरी ऊओह्हह्ह खूब चोदो मुझे। गोविन्द जी भी उषा की बातों को सुन कर बोले, “ले रण्डी, छिनाल ले अपने चूत में अपने ससुर का लण्ड का ठोक कर ले। आज देखते है कि तू कितनी बड़ी छिनाल चुद्दकड़ है। आज मैं तेरी चूत को अपने हलवी लण्ड से चोद चोद कर भोसड़ा बना दूंगा। ले मेरी चुदक्कड़ बहू ले मेरा लण्ड अपनी चूत में खा।” गोविंद जी इतना कह कर फिर से उषा कि चूत में अपना लण्ड जोर जोर से पेलने लगे और थोड़ी देर के बाद अपना लण्ड जड़ तक ठूंस कर अपनी बहू कि चूत के अन्दर झड़ गये। उषा भी अपने ससुर कि लण्ड को चूत को उठा कर अपनी चूत में खाती खाती झड़ गई। थोड़ी देर तक दोनो ससुर और बहू अपनी चुदाई से थक कर सुस्त पड़े रहे।

थोड़ी देर के बाद उषा ने अपनी आंखे खोली और अपने ससुर और खुद को नंगी देख कर शर्मा कर अपने हाथों से अपना चेहेरा ढक लिया। तब गोविन्द जी उठ कर पहले बाथरूम में जा कर अपना लण्ड धो कर साफ़ करने के बाद फिर से उषा के पास बैठ गये और उसके शरीर से खेलने लगे। गोविन्द जी ने अपने हाथों से उषा का हाथ उसके चेहरे से हटा कर अपने बहू से पूछा, “क्यों, छिनाल चुद्दकड़ रण्डी उषा मज़ा आया अपने ससुर के लण्ड से अपनी चूत चुदवा कर? बोल कैसा लगा मेरा लण्ड और उसके धक्के?” उषा अपने हाथों से अपने ससुर को बांध कर उनको चूमते हुए बोली, “बाबूजी अपका लण्ड बहुत शानदार है और इसको किसी भी औरत कि चूत को चोद कर मज़ा देने कि कला आती है। लेकिन, सबसे अच्छा मुझे आपका चोदते हुए गन्दी बात करना लगा। सच जब आप गन्दी बात कराते है और चोदते है तो बहुत अच्छा लगता है।” गोविन्द जी ने अपने हाथों से उषा कि चूंची को पकड़ कर मसलते हुए बोले, “अरे छिनाल, जब हम गन्दा कम कर रहे है तो गन्दी बात करने में क्या फ़रक पड़ता है और मुझको तो चुदाई के समय गाली बकने कि आदत है। अच्छा अब बोल तुझे मेरा चुदाई कैसी लगी? मज़ा आया कि नही, चूत कि खुजली मिटी कि नही?” उषा ने तब अपने हाथों से अपने ससुर का लण्ड पकड़ कर सहलाते हुए बोली, “ससुरजी आपका लण्ड बहुत ही शानदार है और मुझे अपसे अपनी चूत चुदवा कर बहुत मज़ा आया। लगता है कि आपके लण्ड को भी मेरी चूत बहुत पसंद आई। देखिये ना, आपका लण्ड फिर से खड़ा हो रहा है। क्या बात है एक बार और मेरी चूत में घुसना चहता है क्या?” गोविंदजी ने तब अपने हाथ उषा कि चूत पर फेराते हुए बोले, “साली कुतिया, एक बार अपने ससुर का लण्ड खा कर तेरी चूत का मन नही भरा, फिर से मेरा लण्ड खाना चाहती है? ठीक है मैं तुझको अभी एक बार फिर से चोदता हूं।”

गोविन्द जी कि बात सुन कर उषा झट से उठ कर बैठ गई और अपने ससुर के समने झुक कर अपने हाथ और पैर के बल बैठ कर अपने ससुर से बोली, “बाबू जी, अब मेरी चूत में पीछे से अपना लण्ड डाल कर चोदिये। मुझे पीछे से चूत में लण्ड डलवाने में बहुत मज़ा आता है।” गोविन्द जी ने तब अपने सामने झुकी हुई उषा की चूतड़ पर हाथ फेराते हुए उषा से बोले, “साली कुत्ती तुझको पीछे से लण्ड डलवाने में बहुत मज़ा आता है? ऐसा तो कुतिया चुदवाती है, क्या तू कुतिया है?” उषा अपना सिर पीछे घुमा कर बोली, “हां मेरे चोदू ससुरजी मैं कुतिया हूं और इस समय आप मुझे कुत्ता बन कर मेरी चूत चोदेंगे। अब जल्दी भी करिये और शुरु हो जाओ जल्दी से मेरी चूत में अपना लण्ड डालिये।” गोविन्द जी अपने लण्ड पर थूक लगाते हुए बोले, “ले मेरी रण्डी बहू ले, मैं अभी तेरी फुदकती चूत में अपना लण्ड डाल कर उसकी खबार लेता हूं। साली तू बहुत चुद्दकड़ है। पता नहीं मेरा बेटा तुझको शान्त कर पायेगा कि नही।” और इतना कहकर गोविन्द जी अपने बहू के पीछे जाकर उसकि चूत अपने अंगुलियों से फैला कर उसमे अपना लण्ड डाल कर चोदने लगे। चोदते चोदते कभी कभी गोविन्द जी अपना अंगुली उषा कि गाण्ड में घुसा रहे थे और उषा अपनी कमार हिला हिला अपनी चूत में ससुर के लण्ड को अन्दर भर कर करवा रही थी। थोड़ी देर के चोदने के बाद दोनो बहू और ससुर जी झड़ गये। तब उषा उठ कर बाथरूम में जाकर अपना चूत और जांघे धोकर अपने बिस्तर पर आकर लेट गई और गोविन्द जी भी अपने कमरे जाकर सो गये।

अगले हफ़्ते रमेश और उषा अपने हनीमून मनाने अपने एक दोस्त, जो कि शिमला में रहता है, चले गये। जैसे ही रमेश और उषा शिमला एयरपोर्ट से बाहर निकले तो देखा कि रमेश का दोस्त, गौतम और उसकी बीवी सुमन दोनो बाहर अपनी कार के साथ उनका इन्तज़ार कर रहे है। रमेश और गौतम आगे बढ कर एक दूसरे के गले लग गये। फिर दोनों ने अपनी अपनी बीवियों से परिचय करवा दिया और फिर कार में बैठ कर घर की तरफ़ चल पड़े। घर पहुंच कर रमेश और गौतम बैठक में बैठ कर पुरानी बातो में मशगूल हो गय और उषा और सुमन दूसरे कमरे में बैठ कर बाते करने लगे। थोड़ी देर के बाद रमेश और गौतम अपनी बीवियों को बुलाकर उनसे कहा कि खाना लगा दो बहुत जोर की भूख लगी है। सुमन ने फटाफ़ट खाना लगा दिया और चारों डाईनिंग टेबल पर बैठ कर खाने लगे। खाना खाते समय उषा देख रही थी कि रमेश सुमन को घूर घूर कर देख रहा है और सुमन भी धीरे धीरे मुसकुरा रही है। उषा को दाल में कुछ काला नज़र आया। लेकिन वो कुछ नही बोली।

अगले दिन सुबह गौतम नहा धो कर और नाश्ता करने के बाद अपने ऑफ़िस के लिये रवाना हो गया। घर पर उषा, रमेश और सुमन पर बैठ कर नाश्ता करने के बाद गप लड़ा रहे थे। उषा ने आज सुबह भी ध्यान दिया कि रमेश अभी भी सुमन को घूर रहा है और सुमन धीरे धीरे मुसकुरा रही है। थोड़ी देर के बाद उषा नहाने के लिये अपने कपड़े ले कर बाथरूम में गई। करीब आधे घण्टे के बाद जब उषा बाथरूम से नहा धो कर सिरफ़ एक तौलिया लपेट कर बथरूम से निकली तो उसने देखा कि सुमन सिरफ़ ब्लाऊज और पेटीकोट पहने टांगे फैला कर अपनी कुरसी पर फैली आधी लेटी और आधी बैठी हुई है और उसके ब्लाऊज के बटन सब के सब खुले हुए है रमेश झुक कर सुमन की एक चूंची अपने हाथों से पकड़ चूस रहा है और दूसरे हाथ से सुमन की दूसाड़ी चूंची को दबा रहा है। उषा यह देख कर सन्न रह गई और अपनी जगह पर खड़ी कि खड़ी रह गई। तभी सुमन कि नज़र उषा पर पर गई तो उसने अपनी हाथ हिला कर उषा को अपने पास बुला लिया और अपनी एक चूंची रमेश से छुड़ा कर उषा की तरफ़ बढा कर बोली, “लो उषा तुम भी मेरी चूंची चूसो।” रमेश चुपचाप सुमन कि चूंची चूसता रहा और उसने उषा कि तरफ़ देखा तक नही। सुमन ने फिर से उषा से बोली, “लो उषा तुम भी मेरी चूंची चूसो, मुझे चूंची चुसवाने में बहुत मज़ा मिलता है तभी मैं रमेश से अपनी चूंची चुसवा रही हूं।” उषा अब कुछ नही बोली और सुमन की दूसाड़ी चूंची अपने मुंह में भर कर चूसने लगी।

थोड़ी देर के बाद उषा ने देखा कि सुमन अपना हाथ आगे कर के रमेश का लण्ड उसके पैजामे के ऊपर से पकड़ कर अपनी मुट्ठी में लेकर मारोड़ रही है और रमेश सुमन कि एक चूंची अपने मुंह में भर कर चूस रहा है। अब तक उषा भी गरम हो गई थी। तभी सुमन ने रमेश का पैजामे का नाड़ा खींच कर खोल दिया और रमेश का पैजामा सरक कर नीचे गिर गया। पैजामा के नीचे गिरते ही रमेश नंगा हो गया क्योंकि वो पैजामे के नीचे कुछ नही पहन रखा था। जैसे ही रमेश रमेश नंगा हो गया वैसे ही सुमन आगे बढ कर रमेश का खड़े लण्ड को पकड़ लिया और उसका सुपारा को खोलने और बंद करने लगी और अपने होठों पर जीभ फेरने लगी। यह देख कर उषा ने अपने हाथों से पकड़ कर रमेश का लण्ड सुमन के मुंह से लगा दिया और सुमन से बोली, “लो सुमन, मेरे पति का लण्ड चूसो। लण्ड चूसने से तुम्हे बहुत मज़ा मिलेगा। मैं भी अपनी चूत मारवाने के पहले रमेश का लण्ड चूसती हूं। फिर रमेश भी मेरी चूत को अपने जीभ से चाटता है।” जैसे ही उषा ने रमेश का लण्ड सुमन के मुंह से लगाया वैसे ही सुमन ने अपनी मुंह खोल कर के रमेश का लण्ड अपने मुख में भर लिया और उसको चूसने लगी। अब रमेश अपनी कमार हिला हिला कर अपना लण्ड सुमन के मुंह के अन्दर बाहर करने लगा और अपने हाथों से सुमन कि दोनो चूंची पकड़ कर मसलने लगा। तब उषा ने आगे बढ कर सुमन के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। पेटीकोट का नाड़ा खुलते ही सुमन ने अपनी चूतड़ कुरसी पर से थोड़ा सा उठा दिया और उषा अपने हाथों से सुमन की पेटीकोट को खींच कर नीचे गिरा दिया। सुमन ने पेटीकोट के नीचे पेण्टी नही पहनी थी और इसालीये पेटीकोट खुलते ही सुमन भी रमेश कि तरह बिलकुल नंगी हो गई।

उषा ने सबसे पहले नंगी सुमन की जांघो को खोल दिया और उसकी चूत को देखाने लगी। सुमन की चूत पर झांटे बहुत ही करीने से हटाई गई थी और इस समय सुमन कि चूत बिलकुल चमक रही थी। सुमन कि चूत से चुदाई के पहले निकलने वाला रस रिस रिस कर निकल रहा था। उषा झुक कर सुमन के सामने बैठ गई और सुमन कि चूत से अपनी मुंह लगा दिया। उषा का मुंह जैसे ही सुमन कि चूत पर लगा तो सुमन ने अपनी टांगे और फैला दिया और अपने हाथों से अपनी चूत को खोल दिया। अब उषा ने आगे बढ कर सुमन कि चूत को चाटना शुरु कर दिया। उषा अपनी जीभ को सुमन कि चूत के नीचे से लेकर चूत के ऊपर तक ला रही थी और सुमन मारे गरमी के उषा का सर अपने हाथों से पकड़ कर अपनी चूत पर दबा रही थी। उधर रमेश ने जैसे ही देखा कि उषा अपनी जीभ से सुमन कि चूत को चाट रही है तो उसने अपना लण्ड सुमन के मुंह से लगा कर एक हलका सा धक्का दिया और सुमन अपना मुंह खोल कर रमेश का लण्ड अपने मुंह में भर लिया। नीचे उषा अपनी जीभ से सुमन कि चूत को चाट रही थी और कभी कभी सुमन के दाने को अपने दांतो से पकड़ कर हलके हलके से दबा रही थी।

थोड़ी देर तक सुमन कि चूत को चाटने और चूसने का बाद उषा उठ कर खड़ी हो गई और रमेश का लण्ड पकड़ सुमन के मुंह से निकल दिया और सुमन से बोली, “सुमन अब बहुत हो गया लण्ड चूसना और चूत चटवाना चलो अब अपने पैर कुरसी के हत्थो के ऊपर रखो और रमेश का लण्ड अपने चूत में पिलवाओ। मुझे मालूम है कि अब तुम्हे रमेश का लण्ड अपने मुंह में नही अपनी चूत के अन्दर चाहिये।” और उषा ने अपने हाथों से अपने पति का खड़ा हुआ लण्ड सुमन कि गीली चूत कि ऊपर रख दिया। चूत पर लण्ड के रखते ही सुमन ने अपने हाथों से उसको अपनी चूत की छेद से भिड़ा दिया और रमेश कि तरफ़ देख कर मुसकुरा कर बोली, “लो अब तुम्हारी बीवी ने ही तुम्हारा लण्ड को मेरी चूत से भिड़ा दिया। अब देर किस बात का है। चलो चुदाई शुरु कर दो।” इतना सुनते ही रमेश ने अपना कमार हिला कर अपना तना हुआ लण्ड सुमन कि चूत के अन्दर उतार दिया। चूत के अन्दर लण्ड घुसते ही सुमन ने अपने पैर को कुरसी के हत्थों पर रख कर और फैला दिया और अपने हाथों से रमेश का कमार पकड़ कर उसको अपनी तरफ़ खींच लिया। अब रमेश अपने दोनो हाथों से सुमन कि दोनो चूंचियों को पकड़ कर अपना कमार हिला हिला कर सुमन को चोदना शुरु कर दिया। सुमन अपनी चूत में रमेश का लण्ड पिलवा कर बहुत खुश थी और वो मुड़ कर उषा से बोली, “उषा तेरे पति का लण्ड बहुत ही शानदार है, बहुत लम्बा और मोटा है। रमेश का लण्ड मेरे बच्चेदानी पर ठोकर मार रहा है। तेरी ज़िन्दगी तो रमेश से चुदवा कर बहुत आराम से कट रही होगी?” उषा तब रमेश का एक हाथ सुमन कि चूंची पर से हटा कर सुमन कि चूंची को मसलते हुए बोली, “हां, मेरे पति का लण्ड बहुत ही शानदार है और मुझे रमेश से चुदवाने में बहुत मज़ा मिलता है। मैं तो हर रोज़ तीन – चार बार रमेश का लण्ड अपनी चूत में पिलवाती हूं। क्यों, गौतम तेरी चूत नही चोदता? कैसा है गौतम का लण्ड?”

सुमन बोली, “गौतम का लण्ड भी अच्छा है और मैं हर रोज़ दो – तीन बार गौतम के लण्ड से अपनी चूत चुदवाती हूं। गौतम रोज़ रात को हमको रगड़ कर चोदता है और रात कि चुदाई के समय मैं कम से कम से चार-पांच बार चूत का पानी गिराती हूं। लेकिन रमेश के लण्ड की बात ही कुछ और है। यह लण्ड तो मेरे बच्चेदानी पर ठोकर मार रहा है। असल में मुझे अपनी पति के अलावा दूसरे लण्ड से चुदवाने में बहुत मज़ा आता है और जब से मैने रमेश को देखा है, तभी से मैं रमेश का लण्ड खाने के लिये लालायित थी। अब मेरी मन की मुराद पूरी हो गई है। अब शाम को जैसे ही गौतम ऑफ़िस से घर आयेगा उसका लण्ड मैं तेरी चूत में पिलवाऊंगी। तब देखना कि गौतम कैसे तुमको चोदता है। मुझे मालूम है कि गौतम के लण्ड को अपनी चूत से खाकर तुम बहुत खुश होगी।” उषा चुपचाप सुमन कि बात सुनती रही और झुक कर रमेश का लण्ड सुमन की चूत के अन्दर बाहर होना देखती रही। थोड़ी देर के बाद उषा झुक कर सुमन कि एक चूंची अपने मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगी।

थोड़ी देर के बाद उषा को अहसास हुआ कि कोई उसके चूतड़ के ऊपर से उसकी तौलिया हटा कर उसकी चूत में अपना लण्ड घुसेड़ने की कोशिश कर रहा है। उषा ने चौंक कर पीछे मुड़ कर देखा तो पाया कि उसकी चूत में लण्ड घुसेड़ने वला और कोई नही बल्कि गौतम है। हुआ यह कि गौतम के ऑफ़िस में किसी का देहान्त हो गया था और इसालीये ऑफ़िस में छुट्टी हो गई थी। इसलिये गौतम ऑफ़िस जाकर वापस आ गया था।

गौतम अब तक उषा कि बदन से उसकी तौलिया हटा कर अपना तन्नाया हुअ लण्ड उषा कि चूत में डाल चुका था और उषा की कमार को पकड़ के उषा की चूत में अपने लण्ड की ठोकर मारना शुरु हो गया था। गौतम जोर जोर से उषा कि चूत अपने लण्ड से चोद रहा था और अपने हाथों से उषा कि चूंची को मसल रहा था। रमेश इस समय सुमन को जोरदार धक्को के साथ चोद रहा था और उसने अपना सिर घुमा कर जब उषा कि चुदाई गौतम के साथ होते देखा तो मुसकुरा दिया और गौतम से बोला, “देख गौतम देख, मैं तेरे ही घर में और तेरे ही समने तेरी बीवी को चोद रहा हूं। तुझे तेरी बीवी कि चुदाई देख कर कैसा लग रहा है?” गौतम ने तब उषा को चूमते और उसकि चूंची को मलते हुए रमेश से बोला, “अबे रमेश, तू क्या मेरी बीवी को चोद रहा है। अरे मेरी बीवी तो पुरानी हो गई है उसकि चूत मैं पिछले दो साल से रात दिन चोद रहा हूं। सुमन कि चूत तो अब काफ़ी फैल चुकी है। अबे तू देख मैं तेरे समने तेरी नई ब्याही बीवी को कुतिया कि तरह झुका कर उसकी टाईट चूत में अपना लण्ड डाल कर चोद रहा हूं। अब बोल किसे ज्यादा मज़ा मिल रहा है। सही में यार रमेश, तेरी बीवी कि चूत बहुत ही टाईट है मगर तेरी बीवी बहुत चुद्दकड़ है, देख देख कैसे तेरी बीवी कि चूत ने मेरा लण्ड पकड़ रखा है।” फिर गौतम उषा कि चूंची को मसालते हुए उषा से बोला, “ओह! ओह! मुझे उषा कि चूत चोदने में बहुत मज़ा मिल रहा है। अह! उषा रानी और जोर से अपनी गाण्ड हिला कर मेरे लण्ड पर धक्का मार। मैं पीछे से तेरी चूत पर धक्का मार रहा हूं। उषा रानी बोल, बोल कैसा लग रहा मेरे लण्ड से अपनी चूत चुदवना। बोल मज़ा मिल रहा कि नही?” तब उषा अपनी गाण्ड को जोर जोर से हिला कर गौतम का लण्ड अपनी चूत को खिलाते हुए गौतम से बोली, “चोदो मेरे राजा और जोर से चोदो। मुझे तुम्हारी चुदाई से बहुत मज़ा मिल रहा है। तुम्हारा लण्ड मेरे चूत की आखरी छोर तक घुस रहा है। ऐसा लग रहा कि तुम्हारा लण्ड का धक्का मेरी चूत से होकर मेरी मुंह से निकल पड़ेगा। और जोर से चोदो, और सुमन और रमेश को दिखा दो कि चूत की चुदाई कैसे कि जाती है।”

गौतम और उषा कि चुदाई देखते हुए सुमन उषा से बोली, “क्यों छिनाल उषा, गौतम का लण्ड पसन्द आया कि नही? मैं ना बोल रही थी कि गौतम का लण्ड बहुत ही शानदार है और गौतम बहुत अच्छी तरह से चोदता है? अब जी भर मस्त चुदवा ले अपनी चूत गौतम के लण्ड से। मैं भी अपनी चूत रमेश से चुदवा रही हूं।” रमेश जोरदार धक्को के साथ सुमन को चोदते हुए बोला, “यार गौतम, यह दोनो औरत बड़ी चुदासी है, चल आज दिन भर इनकी चूत चोद चोद कर इनकी चूतों को भोसड़ा बना देते हैं। तभी इनकी चूतों कि खुजली मिटेगी।” इतना कह कर रमेश सुमन कि चूत पर पिल पड़ा और दना दन चोदने लगा। गौतम भी पीछे नही था, वो अपना हाथों से उषा कि दोनो चूंची पकड़ कर अपनी कमर के झटकों से उषा कि चूत चोदना चालू रखा। थोड़ी देर तक ऐसे ही चुदाई चलती रही और दोनो जोड़े अपने अपने साथियों की जम कर चुदाई चालू रखी और थोड़ी देर के बाद दोनो जोड़े साथ ही झड़ गये। जैसे ही रमेश और गौतम सुमन और उषा कि चूत के अन्दर झड़ने के बाद अपना अपना लण्ड बाहर निकाला तो दोनो का लण्ड सफ़ेद सफ़ेद पानी से सना हुआ था और उधर सुमन और उषा कि चूतों से भी सफ़ेद सफ़ेद गाढा पानी निकल रहा था। झट से सुमन और उषा उठ कर अपने अपने पतियों का लण्ड अपने मुंह में भर कर चूस चूस कर सफ़ किया और फिर एक दूसरे की चूत में मुंह लगा कर अपने अपने पतियों का वीर्य चाट चाट कर साफ़ किया। थोड़ी देर के बाद रमेश और गौतम का सांस नोरमल हुआ और उठ कर एक दूसरे के गले लग गये और बोले। “यार एक दूसरे की बीवीयों को चोदने का मज़ा ही कुछ अलग है। अब जब तक हमलोग एक साथ है बीवीयों को अदल बदल करके ही चोदेंगे।”

थोड़ी देर के बाद सुमन और उषा अपनी कुरसी से उठ कर खड़ी हो गई और तौलिया से अपनी चूत और जांघे पोंछ कर नंगी ही किचन कि तरफ़ चल पड़ी। उनको नंगी जाते देख कर रमेश और गौतम का लण्ड खड़े होना शुरु कर दिया। थोड़ी देर के बाद सुमन और उषा नंगी ही किचन से चाय और नाश्ता ले कर कमरे में आई और कुर्सी पर बैठ गई। रमेश और गौतम भी नंगे ही कुरसी पर बैठ गये। थोड़ी देर के बाद सुमन झुक कर प्याली में चाय पलटने लगी। सुमन के झुकने से उसकि चूंची दोनो हवा ने झूलने लगे। यह देख कर रमेश ने आगे बढ कर सुमन कि चूंचियों को पकड़ लिया और उन्हे दबाने लगा। यह देख कर उषा अपनी कुरसी से उठ कर खड़ी हो गई और गौतम के नंगे गोद पर जा कर बैठ गई। जैसे ही उषा गोद में बैठी गौतम ने अपने हाथों से उषा को जकड़ लिया और उसकी चूंची को दबाने लगा। उषा झुक कर गौतम के लण्ड को पकड़ कर सहलाने लगे और थोड़ी देर के गौतम के लण्ड को अपने मुंह में भर लिया। यह देख कर सुमन चाय बनना छोड़ कर रमेश के पैरो के पस बैठ गई उसने भी रमेश का लण्ड अपने मुंह में भर लिया। थोड़ी देर के बाद रमेश ने अपने हाथों से सुमन को खड़े किया और उसको टेबल के सहारे झुका कर सुमन कि चूत में पीछे से जाकर अपना लण्ड घुसेड़ दिया। सुमन एक हल्की से सिसकरी भर कर अपने चूतड़ हिला हिला अपनी चूत में रमेश का लण्ड पिलवती रही और वो खुद उषा और गौतम को देखने लगी। रमेश और सुमन को फिर से चुदाई शुरु करते देख गौतम भी अपने आप को रोक नही पाया और उसने उषा को अपनी गोद से उठा कर फिर से उसके दोनो पैर अपने दोनो तरफ़ करके बैठा लिया। इस तरीके से उषा की चूत ठीक गौतम के लण्ड के सामने थी। उषा ने अपने हाथों से गौतम के लण्ड को पकड़ कर अपनी चूत से भिड़ा कर गौतम के गोद पर झटके साथ बैठ गई और गौतम का लण्ड उषा कि चूत के अन्दर चला गया। उषा अब गौतम के गोद पर बैठ कर अपनी चूतड़ उठा उठा कर गौतम के लण्ड का धक्का अपनी चूत पर लेने लगी। कमरे सिर्फ़ फस्सह, फस्सह का आवाज गूंज रही थी और उसके साथ साथ सुमन और उषा की सिसकियां।

रमेश थोड़ी देर तक सुमन कि चूत पीछे से लण्ड डाल कर चोदता रहा। थोड़ी देर के बाद उसने अपनी एक अंगुली में थूक लग कर सुमन कि गाण्ड में अंगुली करने लगा। अपनी गाण्ड में रमेश कि अंगुली घुसते ही सुमन ओह! ओह! है! कर उठी। उसने रमेश से बोली, “क्या बात है, अब मेरी गाण्ड पर भी तुम्हारी नज़र पड़ गई है। अरे पहले मेरी चूत कि आग को शान्त करो फिर मेरी गाण्ड कि तरफ़ देखना।” लेकिन रमेश अपनी अंगुली सुमन की गाण्ड के छेद पर रख कर धीरे धीरे घुमाने लगा। थोड़ी देर के बाद रमेश ने अपनी अंगुली सुमन कि गाण्ड में घुसेड़ दिया और धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा। सुमन भी अपना हाथ नीचे ले जाकर अपनी चूत कि घुण्डी को सहलाने लगी। जब अपनी थूक और अंगुली से रमेश ने सुमन कि गाण्ड कि छेद काफ़ी गीली कर ली तब रमेश ने अपने लण्ड पर थूक लगाकर सुमन कि गाण्ड की छेद पर रखा। अपनी गाण्ड में रमेश का लण्ड छूते ही सुमन बोल पड़ी, “अरे अरे क्या कर रहे हो। मुझे अपनी गाण्ड नही चुदवाना है। मुझे मालूम है कि गाण्ड मरवाने से बहुत तकलीफ़ होती है। हटो, रमेश हटो अपना लण्ड मेरी गाण्ड से हटा लो।” लेकिन तब तक रमेश ने अपना खड़े हुअ लण्ड सुमन कि गाण्ड के छेद पर रख कर दबाने लगा था और थोड़ी से देर के बाद रमेश का लण्ड का सुपारा सुमन कि गाण्ड कि छेद में घुस गया। सुमन चिल्ला पड़ी, “अर्रर्रीईए माआर्रर्र डालाआआ, ओह! ओह! रमेस्सास्सह्हह निकल्लल्लल्ल लूऊ अपनाआ म्मूस्सास्साअर्रर ज्जजाआईस्सास्साअ लण्ड्दद्दद म्ममीर्ररीई गाआनद्दद सीई। मैईई मार्रर्र जौनगीईए।”

लेकिन रमेश कहना सुनने वाला था। वो अपना कमर घुमा कर के और अपना लण्ड को हाथ से पकड़ के एक धक्का मारा तो उसका आधा लण्ड सुमन कि गाण्ड में घुस गया। सुमन छटपटाने लगी।

थोड़ी देर के बाद रमेश थोड़ा रुक कर एक धक्का और मारा तो उसका पूरा का पूरा लण्ड सुमन कि गाण्ड में घुस गया और वो झुक कर एक हाथ से सुमन की चूंची सहलने लगा और दूसरे हाथ से सुमन की चूत में अंगुली करने लगा। लेकिन सुमन मारे दर्द के छटपटा रही थी और बोल रही थे, “अबे साले भड़ुवे गौतम, देखो तुम्हारे सामने तुम्हारि बीवी कि गाण्ड कैसे तुम्हारा दोस्त जबरदस्ती से मार रहा है। तुम कुछ करते क्यों नही। अब मेरी गाण्ड आज फट जायेगी। लग रहा है आज इस चोदु रमेश मेरी गाण्ड मार मार कर मेरी गाण्ड और बुर एक कर देगा। गौतम प्लीज तुम रमेश से मुझे बचाओ।” तब रमेश अपने अंगुलियों से सुमन की चूत में अंगुली करते हुए सुमन से बोला, “अरे सुमन रानी, बस थोड़ी देर तक सबर करो, फिर देखना आज गाण्ड मरवाने ने तुम्हे कितना मज़ा मिलता है। आज मैं तुम्हारी गाण्ड मार कर तुम्हारी चूत का पानी निकालूगा। बस तुम ऐसे ही झुक कर खड़ी रहो।” रमेश की बात सुन कर गौतम अपना लण्ड से उषा कि चूत चोदता हुअ सुमन से बोला, “रानी, आज तुम रमेश का मोटा लण्ड अपनी गाण्ड डलवा कर खूब मज़े उड़ाओ, मैं भी अभी अपना लण्ड रमेश की नई बीवी कि गाण्ड में घुसेड़ता हूं और फिर उषा की गाण्ड मारता हूं। मैं उषा की गाण्ड मार कर तुम्हारी गाण्ड मारने का बदला निकलता हूं।” उषा जैसे ही गौतम की बात सुनी तो बोल पड़ी, “अरे वाह क्या हिसाब है, रमेश आज मौका पा कर सुमन कि गाण्ड मार रहा है और उसकी कीमत मुझे अपनी गाण्ड मारवा कर चुकनी पड़ेगी। नही मैं तो अपनी गाण्ड में लण्ड नही पिलवती। गौतम तुम मेरी गाण्ड के बजाय रमेश कि गाण्ड मार कर अपना बदला निकालो।” गौतम तब उषा से बोला, “नहीं मेरी चुद्दकड़ रानी, जिस तरह से रमेश ने मेरी बीवी कि गाण्ड में अपना लण्ड घुसेड़ कर मेरी बीवी की गाण्ड मार रहा है, मैं भी उसी तरह से रमेश कि बीवी की गाण्ड में अपना लण्ड घुसेड़ कर रमेश कि बीवी कि गाण्ड मारुंगा और तभी मेरा बदला पूरा होगा।” इतना कह कर गौतम ने अपना लण्ड उषा कि चूत से निकाल लिया और उसमे फिर से थोड़ा थूक लगा कर उषा कि गाण्ड से भिड़ा दिया। उषा अपनी कमर इधर उधर घुमाने लगी लेकिन गौतम ने अपने हाथों से उषा की कमर पकड़ कर अपना लण्ड का आधा सुपारा उषा कि गाण्ड कि छेद में डाल दिया। उषा दर्द के मारे छटपटाने लगी।

उषा अपनी गाण्ड से गौतम का लण्ड को निकालने कि कोशिश कर रही थी और गौतम अपने लण्ड को उषा कि गाण्ड में घुसेड़ने कि कोशिश कर रहा था। इसी दौरान गौतम ने एक बार उषा कि कमर को कस कर पकड़ लिया और अपनी कमर हिला करके एक धक्का मारा तो उसके लौड़े का सुपारा उषा कि गाण्ड कि छेद में घुस गया। फिर गौतम ने जलदी से एक और जोरदार धक्का मारा तो उसका पूरा का पूरा लण्ड उषा की गाण्ड में घुस गया और गौतम की झांटे उषा कि चूतड़ को छूने लगी। अपनी गाण्ड ने गौतम का लण्ड के घुसते ही उषा जोर से चीखी और चिल्ला कर बोली, “साले बहनचोद, दूसरे कि बीवी कि गाण्ड मुफ़्त में मिल गया तो क्या उसको चोदना जरूरी है? भोसड़ी के निकाल अपना मूसल जैसा लण्ड मेरी गाण्ड से और जा अपना लण्ड अपनी मा कि गाण्ड में या उसकी बुर में घुसा दे। अरे रमेश तुमहे दिख नही रहा है, तुम्हारा दोस्त मेरी गाण्ड फाड़ रहा है? अरे कुछ करो भी, रोको गौतम को, नही तो गौतम मेरी गाण्ड मार मार कर मुझे गाण्डु बना देगा फिर तुम भी मेरी चूत छोड़ कर के मेरी गाण्ड ही मारना।” रमेश अपना लण्ड सुमन की गाण्ड के अन्दर बाहर कराते उषा से बोला, “अरे रानी, क्यों चिल्ला रही हो। गौतम तुम्हे अभी छोड़ देगा और एक-दो गाण्ड मारवने से कोइ गाण्डु नही बन जाता है। देखो ना मैं भी कैसे गौतम कि बीवी कि गाण्ड ने अपना लण्ड अन्दर बहर कर रहा हूं। तुमको अभी थोड़ी देर के बाद गाण्ड मारवने में भी बहुत मज़ा मिलेगा। बस चुपचाप अपनी गाण्ड में गौतम का लण्ड पिलवाती जाओ और मज़ा लूटो। इतना सुनते ही गौतम ने अपना हाथ आगे बढा कर उषा कि एक चूंची पकड़ कर मसलने लगा और अपना कमर हिला हिला कर अपना लण्ड उषा कि गाण्ड के अन्दर बाहर करने लगा। थोड़ी देर के उषा को भी मज़ा आने लगा और वो अपनी कमर चला चला कर गौतम का लण्ड अपनी गाण्ड से खाने लगी। थोड़ी देर के बाद रमेश और गौतम दोनो ही सुमन और उषा कि गाण्ड में अपना लण्ड के पिचकारी से भर दिया और सुस्त हो कर सोफ़ा में लेट गये।

इस तरह से रमेश और उषा जब तक गौतम और सुमन के घर पर रुके रहे तब तक दोनो दोस्त एक दूसरे कि बीवीयों की चूत चोद चोद कर मज़ा मारते रहे। कभी कभी तो दोनो दोस्त उषा या सुमन को एक साथ चोदते थे। एक बिस्तर पर लेट कर नीचे से अपना लण्ड चूत में डालता था और दूसरा अपना लण्ड ऊपर से गाण्ड में डालता था। उषा और सुमन भी हर समय अपनी चूत या गाण्ड मरवाने के लिये तैयार रहती थी। जब सब लोग घर के अन्दर रहते थे तो सभी नंगे ही रहते थे। उषा और सुमन भी नंगी हो कर ही चाय या खाना बनाती थी और जब भी रमेश या गौतम उनके पास अता था तो वो झुक कर उनका लण्ड अपने मुंह में भर कर चूसती थी और जैसे ही लण्ड खड़े हो जाता था तो खुद अपने हाथों से खड़े लण्ड को अपनी चूत से भिड़ा कर खुद धक्का मार कर अपनी चूत में भर लेती थे। एक हफ़्ता तक उषा और रमेश अपने दोस्त के घर बने रहे और फिर वापस अपने घर के लिये चल पड़े।

जब प्लेन में रमेश और उषा अपने घर के लिये जा रहे थे तो रमेश ने उषा से पूछा, क्यों उषा रानी, एक बात सही सही बातओ, कौन ज्यादा अच्छा चोदता है, मैं, गौतम या पिताजी?” रमेश का बात सुन कर उषा बिलकुल अचम्भित हो गई, फिर उसने धीरे से पूछा, “पिताजी से चुदाई कि बात तुमको कैसे मालूम? तुम तो अपनी सुहागरात पर ड्यूटी पर थे?” तब रमेश धीरे से उषा को चूमते हुए बोला, “हां, तुम ठीक कह रही हो, मुझे उस दिन ड्यूटी पर जाना पड़ा। जब हम अपनी ड्यूटी से करीब एक घण्टे के बाद लौटा तो देखा तुम पिताजी का लण्ड पकड़ चूस रही हो और पिताजी तुम्हारी चूत में अपनी अंगुली पेल रहे है। यह देख मैं चुपचाप कमरे के बहर खड़े हो कर तुम्हे और पिताजी का चुदाई खत्म होते वक्त तक देखा और फिर लौट गया और सुबह ही घर पर आया।”

“क्या तुम मुझसे नाराज़ हो” उषा धीरे से रमेश से पूछा।

“नही, मैं तुम से बिलकुल भी नाराज नही हूं। तुमने पिताजी को अपनी चूत दे कर एक बहुत बड़ा उपकार किया है” रमेश बोला। उषा यह सुन कर बोली, “वो कैसे”। तब रमेश बोला, “अरे हमारी माताजी अब बुड्ढी हो गई है और उनको टांगे उठाने में तकलीफ़ होते है, लेकिन पिताजी अभी भी जवान हैन। उनको अगर घर पर चूत नही मिलती तो वो जरूर से बाहर जाकर अपना मुंह मारते। उसमे हम लोगो कि बदनामी होती। हो सकता कि पिताजी को कोई बिमारी ही हो जाती। लेकिन अब यह सब नही होगा क्योंकि उनको घर पर ही तुम्हारी चूत चोदने को मिल जाया करेगा।”

“तो क्या मुझको पिताजी से घर में बार बार चुदवाना पड़ेगा?” उषा ने पलट कर रमेश से पूछा।

“नही बार बार नही, लेकिन जब उनकी मरज़ी हो तुम उनको अपनी चूत देने से मना मत करना।”

“लेकिन अगर तुम्हारी माताजी ने देख लिया तो?” उषा ने पूछा।

“तब की बात तब देखी जायेगी” रमेश ने कहा।

फिर उषा और रमेश अपने घर आ गये और वे अपने अपने कम पर लग गये। रमेश अब पूरी तरह से ड्यूटी करता और रात को उषा को नंगी करके खूब चोदता था। गोविन्द जी भी कभी कभी उषा को मौका देख चोद लेते थे। फिर कुछ दिनो के बाद उषा और रमेश साथ साथ उषा के मैके गये। ससुराल में रमेश का बहुत आव-भगत हुअ। उषा के जितने रिशतेदार थे उन सभी ने रमेश और उषा को खाने पर बुलया। रमेश और उषा को मज़े ही मज़े थे। अपने ससुराल पर भी रमेश उषा को रात को दो-तीन दफ़ा जरूर चोदता था और कभी मौका मिल गया तो दिन को उषा को बिसतर पर लेटा कर चुदाई चालू कर देता था। एक दिन रमेश पास की किसी दुकन पर गया हुआ था। उषा कमरे में बैठ कर पेपर पढ रही थी। एकाएक उषा को अपनी मा, रजनी जी के रोने कि अवाज़ सुनाई दिया। उषा भाग कर अन्दर गई तो देखा कि रजनी जी भगवानजी के फोटो सामने खड़ी खड़ी रो रही है और भगवानजी से बोल रही है,

“भगवन तुमने ये क्या किया। तुम मेरे पति इतनी जल्दी क्यों उठा लिया और अगर उनको उठा लिया तो मेरी बदन में इतना गरमी क्यों भर दिया। अब मैं जब जब अपनी लड़की और दामाद कि चुदाई देखती हूं तो मेरी शरीर में आग लग जती है। अब क्या करूं? कोइ रास्ता तुम्ही दिखला दो, मैं अपनी गरम शरीर से बहुत परेशान हो गई हूं।” उषा समझ गई कि क्या बात है। वो झट अपनी मा के पास जकर मा को अपने बाहों में भर लिया और पीछे से चूमते हुए बोली,

“मा तुमको इतना दुख है तो मुझसे क्यों नही बोली?” रजनी जी अपने आपको उषा से चुराते हुए बोली,

“मैं अगर तुझे बता भी दूं तो तू क्या कर लेती? तुम भी तो मेरी ही तरह से एक औरत हो?”

“अरे मुझसे कुछ नही होता तो क्या तुम्हारा दामाद तो है? तुम्हारा दामाद ही तुमको शान्त कर देगा” उषा अपनी मा को फिर से पकड़ कर चूमते हुए बोली।

“क्या बोली तू, अपने दामाद से मैं अपनी जिस्म कि भूख शान्त करवाऊंगी? तेरा दिमाग तो ठीक है?” रजनी जी अपनी बेटी उषा से बोली। तब उषा अपने हाथों से अपनी मा कि चूंचियों को पकड़ कर दबाते हुए बोली, “इसमे क्या हुआ? तुम जिस्म कि भूख से मरी जा रही हो, और तुम्हारा दामाद तुम्हारी जिस्म कि भूख को नहीं मिटा सकता है क्या ?, अगर तुम्हारी जगह मैं होती तो मैं अपने दामाद के समने खुद लेट जाती और उससे कहती आओ मेरे प्यारे दामादजी मेरे पास आओ और मेरी जिस्म की आग बुझाओ।”

“चल हट बड़ी चुद्दकड़ बन रही है, मुझे तो यह सोच कर ही शरम आ रही है, कि मैं अपनी दामाद के सामने नंगी लेट कर अपनी टांगे उठाऊंगी और वो मेरी चूत में अपना लण्ड पेलेगा” रजनी जी मुड़ कर अपनी बेटी कि चूंचियों को मसलते हुये बोली।

तभी रमेश, जो कि बाहर गया हुआ था, कमरे में घुसा और घुसते हुए उसने अपनी बीवी और सास की बातों को सुन लिया। रमेश ने आगे बढ कर अपनी सास के सामने घुटने के बल बैठ गया और अपनी सास के चूतड़ों को अपने हाथों से घेर कर पकड़ते हुए सास से बोला, “मा आप क्यों चिन्ता कर रही हैं, मैं हूं ना? मेरे रहते हुए आपको अपनी जिस्म कि भूख कि चिन्ता नही करनी चाहिये। अरे वो दामाद ही बेकार का है जिसके होते हुए उसकि सास अपनी जिस्म की भूख से पागल हो जाये।”

“नही, नही, छोड़ो मुझे। मुझे बहुत शरम लग रही है” रजनी जी ने अपने आप को रमेश से छुड़ाते हुए बोली। तभी उषा ने आगे बढ कर अपनी मा कि चूंची को पकड़ कर मसलते हुए उषा अपनी मा से बोली, “क्यों बेकार की शरम कर रही हो मा। मन भी जाओ अपने दामाद की बात और चुपचाप जो हो रहा उसे होने दो।” तब थोड़ी देर चुप रहने के बाद रजनी जी अपनी बेटी की तरफ़ देख कर बोली, “ठीक है, जैसे तुम लोगो कि मरज़ी। लेकिन एक बात तुम दोनो कान खोल कर सुन लो। मैं अपने दामाद के समने बिलकुल नंगी नही हो पाऊंगी। आगे जैसा तुम लोग चाहो।” इतना सुन कर रमेश मुसकुरा कर अपने सास से कह, “अरे सासुमा आप को कुछ नही करना है। जो कुछ करमा मैं ही करुंगा, बस आप हमारा साथ देती जाये।”

फिर रमेश उठ कर खड़े हो गया और अपनी सास को अपनी दोनो बाहों में जकड़ कर चूमने लगा। रजनी जी चुपचाप अपने आप को अपने दामाद के बाहों में छोड़ कर खड़ी रही। थोड़ी देर तक अपने सास को चूमने के बाद रमेश ने अपने हाथों से अपने सास कि चूंची पकड़ कर दबाने लगा। अपने चूंचियों पर दामाद का हाथ पड़ते ही रजनी जी मारे सुख के बिलबिला उठी और बोलने लगी, “और जोर से दबाओ मेरी चूंचियो को बहुत दिन हो गये किसी ने इस पर हाथ नही लगाया है। मुझे अपने दामाद से चूंची मसलवाने में बहुत मज़ा मिल रहा है। और दबाओ। आ बेटी तू ही आ मेरे पास आजा और मेरे इन चूंचियों से खेल।” अब रमेश फिर से अपने सास के पैरों के पास बैठ गया और उनकी साड़ी के ऊपर से ही उनकी चूत को चूमने लगा। रजनी जी अपने चूत के ऊपर अपने दामाद के मुंह लगते ही बिलबिला उठी और जोर जोर से सांस लेने लगी।

रमेश भी उनकी साड़ी के ऊपर से ही उनकी चूत को चूमता रहा। थोड़ी देर के बाद रजनी जी से सहा नही गया और खुद ही अपने दामाद से बोली, “अरे अब कितना तड़पाओगे। तुम्हे चूत में अंगुली या जीभ घुसानी है तो ठीक तरीके से घुसाओ। साड़ी के ऊपर से क्या कर रहे हो?” अपनी सास कि बात सुन कर रमेश बोला, “मैं क्या करता, आपने ही कहा था आप साड़ी नही उतारेंगे। इसिलिये मैं आपकी साड़ी के ऊपर से ही आपकी चूत चूम रहा हूं।”

“वो तो ठीक है, लेकिन तुम मेरी साड़ी उठा कर भी तो मेरी चूत का चुम्मा ले सकते हो?” रजनी जी ने अपने दामाद से बोली। अपनी सास कि बात सुनते ही रमेश ने जल्दी से अपनी सास की साड़ी को पैरों के पास से पकड़ कर ऊपर उठाना शुरु कर दिया और जैसे ही साड़ी रजनी जी की जांघो तक उठ गई तो रजनी जी मारे शरम के अपना चेहेरा अपने हाथों से ढक लिया और अपने दामाद से बोली, “अब बस भी करो, और कितना साड़ी उठाओगे। अब मुझे शरम आ रही है। अब तुम अपना सर अन्दर डाल कर मेरी चूत को चूम लो।” लेकिन रमेश अपनी सास कि बात को अनसुनी करते हुए रजनी जी की साड़ी को उनकी कमर तक उठा दिया और उनकी नंगी चूत पर अपना मुंह लगा कर चूत को चूम लिया। थोड़ी देर तक रजनी जी की नंगी चूत को चूम कर रमेश अपनी सास कि चूत को गौर से देखने लगा और अपनी अंगुलियों से उनकी चूत की पत्तियों और दाने से खेलने लगा। रमेश कि हरकतों से रजनी जी गरमा गई और उनकी सांस जोर जोर से चलने लगी।

अपनी मा की हालत देख कर उषा आगे बढ कर अपनी मा की चूंचियो से खेलने लगी और धीरे धीरे उनकी ब्लाऊज के बटन खोलने लगी। रजनी ने अपने हाथों से अपने ब्लाऊज को पकड़ते हुए अपने बेटी से पूछने लगी, “क्या कर रही हो? मुझे बहुत शरम लग रही है। छोड़ दे बेटी मुझको।“ उषा अपनी काम जारी रखते हुए अपनी मा से बोली, “अरे मा, जब तुम अपने दामाद का मूसल अपने चूत में पिलवाने जा रही हो तो फिर अब शरम कैसी? खोल दे अपने इन कपड़ों को और पूरी तरफ़ से नंगी हो कर मेरे पति के लण्ड का सुख अपने चूत से लो। छोड़ो अब, मुझको तुम्हारे कपड़े खोलने दो।” इतना कह कर उषा ने अपनी मां का ब्लाऊज, ब्रा, साड़ी और फिर उनकी पेटीकोट भी उतार दिया। अब रजनी जी अपने दामाद के समने बिलकुल नंगी खड़ी थी। रमेश अपने नंगी सास को देखते ही उन पर टूट पड़ा और एक हाथ से उनकी चूंचियो को मलता रहा और दूसरे हाथ से उनकी चूत को मसलता रहा। रजनी जी भी गरम हो कर अपने दामाद का कुरता और पैजामा उतर दिया। फिर झुक कर अपने दामाद का अन्डरवियर भी उतार दिया। अब सास और दामाद दोनो एक दूसरे के सामने नंगे खड़े थे।

जैसे ही रजनी जी ने रमेश का मोटा मस्त लण्ड को देखा, रजनी जी अपने आप को रोक नही पाई और झुक कर उस मस्त लण्ड अपने मुंह में भर कर चूसने लगी। उषा भी चुपचाप खड़ी नही थी। वो अपनी मा के चूतड़ के तरफ़ बैठ कर उसकी चूत से अपना मुंह लगा दिया और अपनी मा कि चूत को चूसने लगी। रजनी जी अपने दामाद का मोटा लण्ड अपने मुंह में भर कर चूसने लगी और कभी कभी उसको अपने जीभ से चाटने लगी। लण्ड को चाटते हुए रजनी जी ने अपने दामाद से बोली, “हाय! रमेश, तुमहरा लण्ड तो बहुत मोटा और लम्बा है। पता नही उषा पहली बार कैसे इसको अपनी चूत में लिया होगा। चूत तो बिलकुल फट गई होगी? मेरे तो मुंह दर्द होने लगा इतना मोटा लण्ड चूसते चूसते। वैसे मुझे पता था कि तुमहरा लण्ड इतना शानदार है”

“कैसे?” रमेश ने अपने सास कि चूंचियों को दबाते हुए पूछा। तब रजनी जी बोली, “कैसे क्या? तुम जब मेरे घर में अपने शादी के बाद आये थे और रोज दोपहर और रात को उषा को नंगी करके चोदते थे तो मैं खिड़की से झांका करती थी और तुम्हारी चुदाई देखा करती थी। उन दिनो से मैं जानती थी कि तुम्हारा लण्ड की साईज़ क्या है और तुम कैसे चूत चाटते हो और चोदते हो।” तब रमेश ने अपने सास कि चूंचियों को मसलते हुए पूछा, “क्या मांजी, आपके पति यानि मेरे ससुरजी का लण्ड इतना मोटा और लम्बा नही था?” “नही, उषा के पापा का लण्ड इतना मोटा और लम्बा नही था, और उनमे सेक्स कि भावना बहुत ही कम थी। इसिलिये वो मुझको हफ़्ते में केवल एक-दो बार ही चोदते थे” रजनी जी ने बोली।

थोड़ी देर के रमेश अपनी सास को बिस्तर पर लेटा कर उसकि चूत से अपना मुंह लगा दिया और अपने जीभ से उसकि चूत को ्चाटना शुरु कर दिया। चूत में जैसे ही रमेश की जीभ घुसी तो रजनी जी अपनी कमर उचकते हुए बोली, “उम्मम्म, अह्हह, ऊइ मा, राजा अभी छोड़ो ना क्यूं तड़पाते हो, मैं जल रही हूं, तुम्हारा लण्ड मुझे चूसना है। तुम्हारा लण्ड तो घोड़े जैसे है, मुझे डर लग रहा है जब तुम अन्दर मेरे चूत मैं डालोगे तो मेरी चूत तो फ़ट जायेगी। मेरी चूत का छेद बहुत छोटा है और ज्यादा चुदि भी नही है। आज तुम पहली बार मेरी चूत में अपन लण्ड डालने जा रहे हो। आराम से डालना और बड़े प्यार से मेरी चूत को चोदना”

तब रमेश ने अपना लण्ड अपनी सास कि चूत पर लगाते हुए बोला, “कोई बात नही मांजी, आपकी चूत को जो भी कमी पहले थी अब उसको मैं पूरा करुंगा। मैं अब रोज़ आपकी और आपकी बेटी को एक ही बिस्तर पर लेटा कर अपन लोगों कि चूत चोदुंगा।”

यह सुनते ही उषा अपने मम्मी से बोली, “मां अब तो तुम खुश हो? अब से रोज़ तुम्हारा दामाद तुमको और मुझको नंगी करके हमारी चूत चोदेगा। हां, अगर तुम चाहो तो तुम अपनी गाण्ड में भी अपने दामाद का लण्ड पिलवा सकती हो।” इतना कह कर उषा ने रमेश से बोली, “मेरे प्यारे पति, अब क्यों देर कर रहे हो। जल्दी से अपना यह खड़ा लण्ड मेरी मां कि चूत में पेल दो और उनको तबियत के साथ खूब चोदो। देख नही रहे हो कि मेरी मा तुम्हारा लण्ड अपनी चूत में पिलवाने के कितनी बेकरार है। लाओ मैं ही तुम्हारा लण्ड पकड़ कर पानी मा कि चूत में घुसेड़ देती हूं,” और उषा ने अपने हाथों से पकड़ कर रमेश का लण्ड उसके सास कि चूत पर लगा दिया। रमेश का लण्ड के चूत से लगते ही रजनी जी ने अपनी कमर हिलाना शुरु कर दिया और रमेश ने भी अपनी कमर हिला कर अपना लण्ड अपने सास कि चूत में डाल दिया। रजनी जी कि चूत अपने पति के देहान्त के बाद से चुदी नही थी और इसालिये बहुत टाईट थी और उसमे अपना लण्ड डालने में रमेश को बहुत मज़ा मिल रहा था। रजनी जी भी अपने दामाद का लण्ड अपनी चूत में पेलवा कर सातवें आसमान पर पहुंच गई थी और वो बड़बड़ा रही थी, “आआअह ऊऊऊह आराम से डालो यार, मेरी चूत ज्यादा खुली हुई नहीं है। प्लीज, पूरा लण्ड मत डालो नही तो मेरी चूत फ़ट जायेगी, उई मा।म मर गई, ओह, आह, हन, मेरी चूत फ़ाड़ दो, हां, ज़ोर से, और ज़ोर से, राजा है मादरचोद रमेश आज मेरी चूत फाड़ दो आआअह आआआह ऊऊऊह ज़ोर से डालो, और ज़ोर से डालो, आज जितना ज्यादा मेरी चूत के साथ खेल सकते हो खेलो, राजा यह लण्ड पूरा मुझे दे दो, मै इस के बिना नहीं रह सकती हूं, पूरा लण्ड डालो, उम्मम्मम आआह आआआह” “उम्मम्मम आआआआह चूत में गुड, उम्मम्मम्म अह अह अह ओह्ह ओह नो। मैं चूत खाज से मरी जा रही हूं, मुझे जोर जोर से धक्के मार मार कर चोदो।” थोड़ी देर के बाद रजनी जी ने अपने दामाद को अपने चारों हाथ और पैर से बांध कर बोली, “आआअह आआआआआह उम्मम्मम्म, चोदो मुझे ज़ोर से उम्मम्मम्मम्म, उफ़ मादरचोद बहुत मज़ा आ रहा है, प्लीज रुकना नही, ओह मुझे रगड़ कर चोदो, ज़ोर से चोदो, अपना लण्ड पूरा मुझ को दे दो, तुम जैसा कहोगे मै वैसा ही करूंगी लेकिन मुझे और चोदो, तुम बहुत अच्छा चोदते हो, मुझे ही आज बहुत ज्यादा, चोदो भेनचोद तुम्हारा लण्ड तो तुम्हारे ससुर से भी बड़ा है, चोदो मुझे नहीं तो मै मर जाऊंगी, अभी तो तुम ने मेरी गाण्ड भी मारनी है।”

थोड़ी देर तक रजनी जी कि चूत चोदने के बाद रमेश ने अपनी सास से पूछा, “मा जी मेरी चुदाई आप को कैसी लग रही है?” रजनी अपने दामाद कि लण्ड के धक्के अपने चूत से खाती हुई बोली, “मेरे प्यारे दामाद जी बहुत अच्छा लग रहा है। मुझे तुम्हारी चुदाई बहुत अच्छी लग रही है। तुम चूत चोदने में बहुत ही माहिर हो। बड़ा मजा आ रहा है मुझे तुमसे चुदवाने में डियर ऊओह्हह्ह डियर तुम बहुत अच्छा चोदते हो आआह्हह्हह्ह ऊऊऊह्हह्हह्हह्हह्ह ऊऊओफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़ फ़ुद्दी मारी यू आर एन एक्सपर्ट। तुम्हे मालूम है कि कैसे किसी औरत कि चूत की चुदाई की जाती है और तुम्हे यह भी मालूम है कि एक औरत को कैसे कैसे सुख दिया जा सकता है। यूं ही हां डियर यूं ही चोदो मुझे…बस चोदते जाओ मुझे अब कुछ नहीं पूछो आज जी भर के चोदो मुझे डियर हां डियर जम कर चुदाई करो मेरी तुम बहुत अच्छे हो बस यूं ही चुदाई करो मेरी…ऊऊह्हह्हह्हह…।। खूब चोदो मुझे…" और रमेश अपनी सास को अपनी पूरी ताकत के साथ चोदता रहा।

रमेश अपनी सास कि बात सुन सुन कर बहुत उत्तेजित हो गया और जोर जोर से अपने सास कि चूत में अपना लण्ड पेलने लगा। थोड़ी देर के बाद रमेश को लगा कि अब वो झड़ने वाला है तो उसने अपनी सास से बोली, “सासुमा मैं झड़ने जा रहा हूं।” तो रजनी जी बोली, “राजा, प्लीज मेरी चूत के अन्दर ही झड़ो” और रमेश अपना लण्ड पूरा का पूरा अपनी सास की चूत में लण्ड ठांस कर लण्ड कि पिचकरी छोड़ दिया। थोड़ी देर के बाद रजनी जी भी बिसतर पर से उठ खड़ी हुई और सीधे बाथरूम में जा कर घुस गई। थोड़ी देर के बाद अपनी चूत धो धा कर रजनी जी फिर से कमरे घुसी और मुसकुरा कर अपने दामाद से बोली, “हाय! मेरे राजा आज तो तुमने कमाल ही कर दिया। तुम तो सिरफ़ एक झड़े लेकिन मैं तुम्हारी चुदाई से तीन बार झड़ी हूं। इतनी जोरदार चुदाई मैने कभी नही की। मेरी चूत तो अब दुख रही है।”

तभी उषा, जो कि अपने पति और अपने मा की चुदाई देख रही थी, बोली, “मा अपने दामाद का लण्ड अपनी चूत में पिलवा कर मज़ा आया? मेरी शादी की पहली रात तो मैं बिलकुल मर सी गई थी और अब इस लण्ड से बिना चुदवा कर मेरी तो रात को नीद ही नही आती। मैं रोज़ कम से कम एक बार इस मोटा तगड़ा लण्ड से अपनी चूत जरूर चुदवती हूं या अपनी गाण्ड मरवाती हूं।” तभी रमेश ने अपने सास को अपने बाहों में भर कर बोला, “मां जी, एक बार और हो जाये आपकी चूत की चुदाई। मैं जब कम से कम दो या तीन बार नही चोद लेता हूं मेरा मन ही नही भरता है।” रजनी जी बोली, “अरे थोड़ा रुको, मेरी चूत तुम्हारी चुदाई से तो अब तक कुलबुला रही है। अब तुम एक बार उषा कि चूत चोद डालो।”

“नही मां जी, मैं तो इस वक्त आपकी चूत या गाण्ड में अपना पेलना चाहता हूं। आपकी लड़की कि चूत तो मैं रोज़ रात को चोदता हूं, मुझे तो इस समय आपकी चूत या गाण्ड चोदने की इच्छा है।” तब उषा अपने मा से बोली, “मा चुदवा ना लो और एक बार। अगर चूत बहुत ही कुलबुला रही है तो अपने गाण्ड में ले लो अपने दामाद का लण्ड। कसम से बहुत मज़ा मिलेगा।”

तब रजनी जी बोली, “ठीक है, जब तुम दोनो कि यही इच्छा है, तो यह लो मैं एक बार फिर से चुदवा लेती हूं। लेकिन इस बार मैं गाण्ड में रमेश का लण्ड लेना चाहती हूं। और दो मिनट रुक जओ, मुझे बहुत प्यास लगी है मैं अभी पानी पी कर आती हूं।” तब उषा अपने मा से बोली, “अरे मां, रमेश का लण्ड बहुत देर से खड़े है और आप पानी पीने जा रही हो? इन बिस्तर पर लेटो मैं तुमहरी प्यास अपनी मूत से बुझा देती हूं।”

इतना सुनते ही रजनी जी बोली, “ठीक है ला अपना मूत ही मुझे पिला मैं प्यास से मरी जा रही हूं” और वो बिसतर पर लेट गई। मा को बिस्तर पर लेटा देख कर उषा भी बिस्तर पर चढ गई और अपने दोनो पैर मां के सर के दोनो तरह करके बैठ गई और अपनी चूत रजनी जी के मुंह से भिड़ा दिया। रजनी जी भी अपनी मुंह खोल दिया। मुंह खुलते ही उषा ने पिशाब कि धार अपने मा कि मुंह पर छोड़ दिया और रजनी जी अपनी बेटी की मूत बड़े चाव से पीने लगी। पिशाब पूरा होने पर उषा अपने मा के ऊपर से उठ खड़ी हो गई और रजनी जी के बगल में जा कर बैठ गई। तब रमेश ने अपने सास के बाहों को पकड़ कर उनको बिस्तर पर उल्टा लेटा दिया और उनकी कमर को पकड़ कर उनके चूतड़ को उपर कर दिया। जैसे रजनी जी घोड़ी सी बन कर बिस्तर पर आसन लिया तो रमेश अपने मुंह से थोड़ा सा थूक निकल कर अपने सास कि गाण्ड में लगा दिया और अपना लण्ड को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी सास कि गाण्ड कि छेद में लगा दिया। रजनी जी तब अपने हाथों से अपनी बेटी कि चूंचियों को मसलते हुए बोली, “रमेश मेरे राजा, मैने आज तक कभी गाण्ड नही चुदवाई है और मुझको पता है कि गाण्ड मरवाने में पहले बहुत दर्द होता है। इसलिये तुम आराम से मेरी गाण्ड में अपन लण्ड डालना। जैसे ही रमेश ने जोर लगा कर अपना लण्ड का सुपारा अपनी सास की गाण्ड में घुसेड़ा तो रजनी जी चिल्ला उठी, “आआआह ऊऊऊऊह आआआआह क्या कर रहा हो, मै मार जाऊंगी, राजा तुम तो मेरी गान्ड फ़ाड़ कर रख दोगे, मैने पेहले कभी गाण्ड नहीं मरवाई है प्लीज़ मेरे लल्ला आहिस्ता से करो।” अपनी मा को चिल्लाते देख उषा ने रमेश से बोली, “क्या कर रहे हो, धीरे धीरे आराम से पेलो ना अपना लण्ड। देख नही रहे हो मेरी मां मरी जा रही है। मां कोई भागी थोड़ी ना जा रही है।”

रमेश इतना सुन कर अपनी बीवी से बोली, “क्यों चिन्ता कर रही हो। तुमको अपनी बात याद नही। जब मैने पहली बार अपना लण्ड तुम्हारी गाण्ड में पेला था तो तुम कितना चिल्लाई थी और बाद तुम्ही मुझसे बोल रही थी, और जोर से पेलो, पेलो जितना ताकत है फ़ाड़ दो मेरी गाण्ड, मुझको बहुत मज़ा मिल रहा है और मैं तो अब से रोज तुमसे अपनी गाण्ड में लण्ड पिलवाऊंगी।” उषा अपने पति कि बात सुन कर अपनी मा से बोली, “मा थोड़ा सा सबर करो। अभी तुम्हारी गाण्ड का दर्द खतम हो जयेगा और तुमको बहुत मज़ा मिलेगा। रमेश जैसा लण्ड पेल रहा है उसको पेलने दो।”

तब रजनी जी बोली, “वो तो ठीक है, लेकिन अभी तो लग रहा था कि मेरी गाण्ड फटी जा रही है, और मुझको अब पिशाब भी करना है।” रमेश अपनी सास कि बात सुन कर उषा से बोला, “उषा तुम जलदी से किचन में से एक जग लेकर आओ और उसको अपनी मां की चूत के नीचे पकड़ो।” उषा जल्दी से किचन में से एक जग उठा कर लाई और उसको अपनी मां की चूत के नीचे रख कर मां से बोली, “लो अब मूतो, मेरी प्यारी मां। तुम भी मां एक अजीब ही हो। उधर तुमहरा दामाद अपना लण्ड तुम्हारे गाण्ड में घुसेड़ रखा है और तुमको पिशाब करनी है।” रजनी जी कुछ नही बोली और अपने एक हाथ से जग को अपनी चूत के ठीक नीचे लकर चर चर करके मूतने लगी। राजनी को वाकई ही बहुत पिशाब लगी थी क्योंकि जग करीब करीब पूरा का पूरा भर गया था।

जब रजनी जी का पिशाब रुक गया तो उषा ने जग हटा लिया और जग को उठा कर अपने मुंह से लगा कर अपनी मां की पिशाब पीने लगी। यह देख कर रमेश रजनी जी से बोला, “अरे क्या कर रही हो, थोड़ा मेरे लिये भी छोड़ देना। मुझको भी अपने सेक्सी सास कि चूत से निकला हुअ मूत पीना है।” उषा तब बोली, “चिंता मत करो, मैं तुम्हारे लिये आधा जग छोड़ देती हूं।”

थोड़ी देर के बाद रजनी जी अपने दामाद से बोली, “बेटा मैं फिर से तैयार हूं, तुम मुझे आज एक रण्डी की तरह चोदो। मेरी गाण्ड फ़ाड़ दो। मैं बहुत ही गरम हो गई हूं। मेरी गाण्ड भी मेरी चूत कि तरह बिलकुल प्यासी है।” “अभी लो मेरी सेक्सी सासुमा, मैं अभी तुम्हारी गाण्ड अपने लण्ड के चोटों से फ़ाड़ता हूं” और यह कह कर रमेश ने अपना लण्ड फिर से अपने सास कि गाण्ड में पेल दिया। गाण्ड में लण्ड घुसते ही रजनी जी फिर जोर से चिल्लने लगी, “हाय! फ़ाड़ डाला रे मेरी गाण्ड, फ़ाड़ डाला रे। अरे कोई मुझे बचाओ रे, मेरी दामाद और मेरी बेटी दोनो मिल कर मेरी गाण्ड फड़वा डाला।” तब उषा अपने मा से बोली, “अरे मा क्यों एक छिनाल रण्डी की तरह चिल्ला रही हो, चुप हो जाओ और चुपचाप अपने दामाद से अपनी गाण्ड में लण्ड पिलवाती रहो। थोड़ी देर के बाद तुमको बहुत मज़ा मिलेगा।” अपनी बेटी कि बात सुन कर रजनी जी चुप हो गई लेकिन फिर भी उसकी मुंह से तरह तरह की आवाजे निकल रही थी।

“…।आआह्हह्ह……यययौऊ…।ऊऊउफ़्फ़फ़्फ़फ़…।।ईईईइस्सास्सास्सह्हह्हह…।ऊऊओह्हह्हह्ह…।यययौउ…।।ऊउफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़……यह…।।लण्ड बहुत मोटा और लम्बा है। ऊऊऊओमम्म्माआआआहह्हह्हह…है! मैं मरी जा रही हूं। ऊऊउह्हहह्हह……प्लीऽऽऽस्सासे…।आआआआअ…।ऊऊऊफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़…।धीरे…जरा धीरे पेलो मैं मरी जा रही हूं। अरे बेटी, अपने पति से बोल ना कि वो जरा मेरी गाण्ड में अपना लण्ड धीरे धीरे पेले। मुझे तो लग रहा कि मेरी चूत और गाण्ड दोनो एक हो जायेंगी।” थोड़ी देर के बाद रमेश अपना हाथ अपने सास के सामने ले जकर उनकी चूत को सहलाने लगा और फिर अपनी अंगुलियों से उनकी चूत की घुण्डी को पकड़ कर मसलने लगा। अपनी चूत पर रमेश का हाथ पड़ते ही रजनी जी बिलबिला उठी और अपनी कमर हिला हिला कर रमेश के लण्ड पर ठोकर मारने लगी।

यह देख कर रमेश ने उषा से कह, “देख तेरी रण्डी मां कैसे अपनी कमर चला कर मेरे लण्ड को अपने गाण्ड में पिलवा रही है। क्या तुम्हारी यही मां अभी थोड़ी देर पहले अपनी गाण्ड मरवाने पर नहीं चिल्ला रही थी?” यह सुन कर उषा बोली, “ओह्ह रमेश! क्या बात है! देखो मेरी मां क्या मज़े से अपनी गाण्ड से तुम्हारा लण्ड खा रही है। देखो मेरी मां कैसे गाण्ड मरवा रही है। मारो, मारो रमेश, मेरी मा कि गाण्ड में अपना लण्ड खूब जोर जोर से पेलो। इसके पूरे बदन में लण्ड के लिये खुजली भरी पड़ी है। चोदो रमेश साली कि गाण्ड मारो बड़ी खुजली हो रही थी!”

रजनी जी अपनी गाण्ड में दामाद का लण्ड पिलवा कर सातवे आसमन पर थी और बड़बड़ा रही थी, “ओह्हह्ह! देखो उषा मेरी बेटी! तुम्हारी मा गाण्ड में लण्ड लेकर चुदवा रही है! तुम आखिर अपने मरद से मेरी चूत, गाण्ड चोदवा ही दी! देखो साला रमेश कैसे चोद रहा है! साला सच्चा मरद है! डाल और डाल रे! चोद ! मेरी गाण्ड मार! मेरे बेटी को दिखा! आह्हह ऊह्हह्हह्हह चोद चोद चोद ऐईइ!” रमेश अपनी बीवी और अपनी सास की बात सुनता जा रहा था और अपनी कमर चला चला कर अपनी सास की गाण्ड में अपना लण्ड पेलता रहा। थोड़ी देर तक रजनी जी कि गाण्ड मारने के बाद रमेश एक बार जोर से अपना पूरा का पूरा लण्ड रजनी जी कि गाण्ड घुसेड़ दिया और रजनी जी को जोर से अपने हाथों से जकड़ कर अपना लण्ड का पानी अपने सास कि गाण्ड ने छोड़ दिया। झड़ने के बाद रमेश ने अपना लण्ड अपने सास की गाण्ड से बाहर निकाल लिया।

उषा ने अपनी मां को प्यार से गले लगा लिया। रमेश ने भी अपनी सासू मां के चरण स्पर्श किया और फिर तीनो साथ ही एक ही बिस्तर पर ये वादा करके लेट गये कि अब पूरे घर में ऐसा ही प्यार भरा माहौल बना रहे।

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